जनवरी 2026 की शुरुआत ऑटोमोबाइल जगत के लिए धमाकेदार रही है। टोक्यो ऑटो सैलून और CES 2026 में जिस एक कार ने सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरीं, वह कोई बड़ी लग्जरी एसयूवी नहीं थी। वह थी एक छोटी, फुर्तीली और शानदार स्पोर्ट्स कार— Project V।
यह केवल एक इलेक्ट्रिक कार नहीं है। यह उन लोगों के लिए एक जवाब है जो मानते थे कि इलेक्ट्रिक गाड़ियां भारी और बोरिंग होती हैं।
केटरहम (Caterham) की विरासत और यामाहा (Yamaha) की इंजीनियरिंग का यह संगम एक नई क्रांति की शुरुआत है।
हमने इस प्रोटोटाइप का गहराई से विश्लेषण किया है। आइए जानते हैं कि यह कार इतनी खास क्यों है।
Yamaha and Caterham Collaboration Explained
जब दो दिग्गज मिलते हैं, तो इतिहास बनता है। इस प्रोजेक्ट की नींव इसी साझेदारी पर टिकी है।
केटरहम को दुनिया भर में उनकी हल्की और ड्राइवर-फोकस्ड कारों के लिए जाना जाता है। उनकी फिलॉसफी हमेशा से “कम वजन, ज्यादा मजा” रही है।
दूसरी तरफ, यामाहा के पास इलेक्ट्रिक पावरट्रेन की दुनिया का गहरा अनुभव है। उन्होंने इस कार को दिल दिया है—यानी इसका मोटर और पावर सिस्टम।
यह प्रोजेक्ट V मूल रूप से केटरहम का विजन है, लेकिन इसे हकीकत में बदलने की ताकत यामाहा ने दी है।
टोक्यो ऑटो सैलून 2026 में जो प्रोटोटाइप दिखा, वह केवल डिजाइन मॉडल नहीं था। वह एक चलता-फिरता मशीन था, जो ट्रैक पर दौड़ने के लिए तैयार है।
यामाहा ने इसमें अपना अत्याधुनिक e-Axle सिस्टम लगाया है। यह सिस्टम मोटर, गियरबॉक्स और इनवर्टर को एक ही यूनिट में पैक करता है।
यह साझेदारी साबित करती है कि भविष्य की स्पोर्ट्स कारें केवल स्पीड के बारे में नहीं होंगी। वे इंजीनियरिंग के तालमेल का नमूना होंगी।
Project V Design Philosophy
Project V को देखते ही पहली नजर में आपको पुराने क्लासिक रेसर्स की याद आएगी। लेकिन यह पूरी तरह से मॉडर्न है।
डिजाइनर एंथनी जनरली (Anthony Jannarelly) ने इसे एक टाइमलेस लुक दिया है। इसमें कोई फालतू के शार्प एजेज या आक्रामक लाइन्स नहीं हैं।
इसकी बॉडी में कर्व्स हैं जो हवा को चीरने के बजाय उसके साथ बहते हुए लगते हैं। यह एयरोडायनामिक्स का बेहतरीन नमूना है।
सबसे खास बात इसका वजन है। इलेक्ट्रिक कारों का सबसे बड़ा दुश्मन उनका वजन होता है। बैटरियां भारी होती हैं।
लेकिन इस प्रोटोटाइप का लक्ष्य वजन को 1,190 किलोग्राम से कम रखना है। आज की 2-टन वाली इलेक्ट्रिक कारों के मुकाबले यह एक पंख जैसा है।
चेसिस को कार्बन फाइबर और एल्युमिनियम मिश्र धातु से बनाया गया है। इससे मजबूती भी मिलती है और वजन भी कम रहता है।
दरवाजों का डिजाइन भी पारंपरिक है, जो इसे रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए व्यावहारिक बनाता है।
इस कार का डिजाइन चीख-चीख कर कह रहा है कि “सिम्पलीसिटी इज द अल्टीमेट सोफिस्टिकेशन” (सादगी ही परम परिष्कृतता है)।
Yamaha e-Axle Powertrain Technology
अब बात करते हैं उस तकनीक की जो इस मशीन को जिंदा करती है। यामाहा का e-Axle इस कार का असली गेम-चेंजर है।
आमतौर पर इलेक्ट्रिक मोटर्स काफी जगह घेरती हैं और भारी होती हैं। लेकिन यामाहा ने इसे अद्भुत तरीके से कॉम्पैक्ट कर दिया है।
इस प्रोटोटाइप में पीछे के पहियों को पावर देने के लिए एक सिंगल मोटर सेटअप लगा है।
यह मोटर 268 bhp (200 kW) की पावर जनरेट करती है। सुनने में यह आंकड़ा शायद सुपरकारों जैसा न लगे।
लेकिन याद रखें, यह कार हल्की है। 1200 किलो से कम वजन के साथ, यह पावर इसे रॉकेट जैसी एक्सीलरेशन देती है।
0 से 100 किमी/घंटा की रफ्तार पकड़ने में इसे सिर्फ 4.5 सेकंड से भी कम समय लगता है।
यामाहा ने इस मोटर की ट्यूनिंग ऐसे की है कि यह पेट्रोल इंजन जैसा रिस्पॉन्स दे। थ्रॉटल दबाते ही तुरंत टॉर्क मिलता है।
पावर डिलीवरी रैखिक (linear) है। यानी आपको झटके नहीं लगते, बल्कि एक स्मूथ और तेज खिंचाव महसूस होता है।
इस e-Axle की दक्षता (efficiency) भी कमाल की है, जिससे बैटरी की खपत कम होती है और रेंज बढ़ती है।
Innovative Battery Cooling System
इलेक्ट्रिक स्पोर्ट्स कारों की सबसे बड़ी चुनौती होती है गर्मी। जब आप तेज गाड़ी चलाते हैं, तो बैटरी बहुत गर्म हो जाती है।
अगर बैटरी गर्म हो जाए, तो कार की परफॉरमेंस गिर जाती है। इसे ‘थर्मल थ्रॉटलिंग’ कहते हैं।
Project V में इस समस्या का एक अनोखा समाधान निकाला गया है। इसमें Dielectric Fluid Immersion Cooling का इस्तेमाल हुआ है।
आसान शब्दों में कहें तो, बैटरी सेल्स सीधे एक कूलेंट लिक्विड (तरल पदार्थ) में डूबे रहते हैं।
ज्यादातर इलेक्ट्रिक कारों में बैटरी के बाहर कूलिंग पाइप्स होते हैं। लेकिन इस तकनीक में कूलिंग सीधे सेल के संपर्क में होती है।
इसका फायदा यह है कि आप कार को ट्रैक पर लगातार तेज चला सकते हैं। बैटरी गर्म नहीं होगी।
साथ ही यह चार्जिंग के समय भी मदद करता है। ठंडी बैटरी तेजी से चार्ज होती है।
यह तकनीक अभी तक केवल रेसिंग या बहुत महंगी हाइपरकारों में देखी गई थी। इसे एक रोड कार में लाना बड़ी बात है।
बैटरी पैक 55 kWh का है। यह दो हिस्सों में बंटा है—एक आगे और एक पीछे।
इस बंटवारे का कारण वजन का संतुलन (Weight Distribution) है। इससे कार को मोड़ने में आसानी होती है।
Driving Dynamics and Handling
एक स्पोर्ट्स कार की असली पहचान उसकी सीधी लाइन की स्पीड नहीं, बल्कि उसके कॉर्नरिंग (मोड़ काटने) की क्षमता होती है।
Project V को चलाने का अनुभव किसी गो-कार्ट (Go-Kart) जैसा महसूस होता है। आप जमीन के करीब बैठते हैं।
डबल विशबोन सस्पेंशन (Double Wishbone Suspension) कार को सड़क से चिपका कर रखता है।
स्टीयरिंग बहुत सटीक है। आपको सड़क का हर टेक्सचर अपने हाथों में महसूस होता है। आज की कई इलेक्ट्रिक कारों में स्टीयरिंग बेजान लगता है, लेकिन यहाँ ऐसा नहीं है।
बैटरी का वजन नीचे होने से कार का गुरुत्वाकर्षण केंद्र (Center of Gravity) बहुत नीचे है।
इसका मतलब है कि तेज मोड़ पर भी कार झुकती नहीं है। वह सपाट रहती है और ड्राइवर को आत्मविश्वास देती है।
यामाहा और केटरहम ने सस्पेंशन की ट्यूनिंग पर बहुत काम किया है। यह न तो बहुत सख्त है कि आपकी कमर टूट जाए, और न ही बहुत नरम।
इसमें ‘ड्राइवर मोड्स’ भी दिए गए हैं—नॉर्मल, स्पोर्ट और स्प्रिंट।
स्प्रिंट मोड में कार अपनी पूरी ताकत खोल देती है। ट्रैक्शन कंट्रोल थोड़ा ढीला हो जाता है ताकि आप थोड़ा स्लाइड कर सकें।
यह कार उन लोगों के लिए है जो ड्राइविंग को एक कला मानते हैं, न कि सिर्फ आवागमन का साधन।
Interior and Seating Layout
कार के अंदर कदम रखते ही आपको एक अलग दुनिया का अहसास होता है। यहाँ सब कुछ ड्राइवर के इर्द-गिर्द बनाया गया है।
प्रोटोटाइप में एक बहुत ही अनोखा 2+1 सीटिंग लेआउट दिखाया गया था।
इसमें ड्राइवर सामने, और पीछे एक यात्री के लिए सीट थी। लेकिन टोक्यो ऑटो सैलून 2026 में दिखे मॉडल में इसे बदलकर 2+2 कर दिया गया है।
अब पीछे दो छोटी सीटें हैं। हालाँकि, वे वयस्कों के लिए बहुत आरामदायक नहीं हैं, लेकिन बच्चों या सामान के लिए ठीक हैं।
डैशबोर्ड बहुत ही मिनिमलिस्ट है। इसमें बड़ी-बड़ी स्क्रीन्स की भरमार नहीं है।
सिर्फ जरूरी जानकारी दिखाने के लिए डिजिटल गेज दिए गए हैं। टचस्क्रीन है, लेकिन वह ध्यान भटकाने वाली नहीं है।
सीटें कार्बन फाइबर की हैं और उन पर बहुत अच्छी क्वालिटी का मटेरियल लगा है। वे आपको तेज मोड़ों पर अपनी जगह पर जकड़ कर रखती हैं।
अंदर का माहौल लग्जरी से ज्यादा ‘परपजफुल’ (उद्देश्यपूर्ण) है। हर बटन और हर स्विच की एक जगह और वजह है।
केबिन में बाहर का शोर बहुत कम आता है, सिवाय उस प्यारी सी इलेक्ट्रिक मोटर की व्हिनिंग साउंड के जो आपको स्पीड का अहसास देती है।
Range and Practicality Review
अक्सर स्पोर्ट्स कारों से अच्छी रेंज की उम्मीद नहीं की जाती। लेकिन Project V ने यहाँ भी सरप्राइज दिया है।
55 kWh की बैटरी के साथ, कंपनी का दावा है कि यह एक चार्ज में 400 किलोमीटर (WLTP साइकिल) तक चल सकती है।
असली दुनिया में, अगर आप इसे बहुत आक्रामक तरीके से नहीं चलाते हैं, तो 300-350 किलोमीटर आसानी से मिल सकते हैं।
एक वीकेंड ट्रिप या संडे ड्राइव के लिए यह रेंज काफी से ज्यादा है।
चार्जिंग स्पीड की बात करें तो यह 150 kW तक की DC फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करती है।
इसका मतलब है कि 20% से 80% चार्ज होने में इसे मुश्किल से 15-20 मिनट लगते हैं। एक कॉफी ब्रेक, और आप फिर से सड़क पर।
ट्रंक स्पेस (डिग्गी) बहुत बड़ा नहीं है, लेकिन दो छोटे बैग रखने के लिए पर्याप्त है।
इस कार का ग्राउंड क्लीयरेंस भी इतना रखा गया है कि यह शहर के स्पीड ब्रेकर को पार कर सके। आप इसे रोज ऑफिस भी ले जा सकते हैं।
यह केवल गैरेज में सजा कर रखने वाली ट्रॉफी नहीं है। इसे चलाया जा सकता है, हर रोज।
Challenges for Mass Production
प्रोटोटाइप बनाना एक बात है, और उसे हजारों की संख्या में बनाकर बेचना दूसरी।
केटरहम एक छोटी कंपनी है। इतने बड़े पैमाने पर एक नई तकनीक वाली कार बनाना उनके लिए एक चुनौती होगी।
हालांकि, यामाहा का साथ होना उनके लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। यामाहा के पास सप्लाई चेन और मैन्युफैक्चरिंग की ताकत है।
एक बड़ी चुनौती कीमत को नियंत्रण में रखना होगी। कार्बन फाइबर और अत्याधुनिक बैटरी तकनीक सस्ती नहीं आती।
अगर इसकी कीमत बहुत ज्यादा हो गई, तो यह पोर्श (Porsche) जैसी स्थापित कंपनियों से मुकाबला कैसे करेगी?
सॉफ्टवेयर इंटीग्रेशन भी एक महत्वपूर्ण पहलू है। आज की गाड़ियों में सॉफ्टवेयर का बहुत बड़ा रोल होता है।
क्या केटरहम और यामाहा मिलकर एक बग-फ्री और स्मूथ यूजर इंटरफेस दे पाएंगे? यह देखना दिलचस्प होगा।
इसके बावजूद, प्रोटोटाइप की क्वालिटी देखकर लगता है कि वे सही दिशा में हैं।
Comparison With Electric Rivals
बाजार में अब कई इलेक्ट्रिक स्पोर्ट्स कारें आ रही हैं। सबसे बड़ा मुकाबला Porsche 718 Electric से होगा।
पोर्श के पास ब्रांड वैल्यू और रिलायबिलिटी है। लेकिन प्रोजेक्ट V के पास उसका हल्का वजन है।
MG Cyberster भी एक कंपीटीटर है। वह सस्ती हो सकती है, लेकिन वह Project V से काफी भारी है।
लोटस (Lotus) की नई इलेक्ट्रिक कारें भी अब बहुत भारी और बड़ी हो गई हैं। वे अब शुद्ध स्पोर्ट्स कार नहीं रहीं।
Project V ने वह जगह पकड़ी है जो लोटस ने खाली कर दी थी—हल्की, सिंपल और मजेदार कार।
अल्पाइन (Alpine) A290 भी कतार में है, लेकिन उसका डिजाइन हैचबैक जैसा है।
Project V उन ड्राइवरों को अपील करेगी जो पुरानी दुनिया का मजा नई तकनीक के साथ चाहते हैं।
यह उन लोगों के लिए नहीं है जो कार में बड़े स्क्रीन और ऑटोमैटिक ड्राइविंग ढूंढ रहे हैं। यह उनके लिए है जो खुद ड्राइव करना चाहते हैं।
Launch Date and Pricing
टोक्यो ऑटो सैलून 2026 में मिली जानकारी के अनुसार, इस कार का प्रोडक्शन वर्जन 2026 के अंत तक तैयार हो सकता है।
डिलीवरी 2027 की शुरुआत में होने की उम्मीद है।
कीमत को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन जानकारों का अनुमान है कि यह लगभग £80,000 (करीब 85 लाख रुपये – बिना टैक्स) के आसपास हो सकती है।
यह सस्ती नहीं है, लेकिन इसकी इंजीनियरिंग और एक्सक्लूसिविटी को देखते हुए यह उचित लगती है।
भारत में अगर यह आती है, तो इम्पोर्ट ड्यूटी लगने के बाद इसकी कीमत काफी ऊपर जाएगी।
लेकिन जो लोग इसे खरीदेंगे, वे इसे पैसे के लिए नहीं, बल्कि इसके अनुभव के लिए खरीदेंगे।
The Verdict: Future Classic?
क्या Yamaha Project V सफल होगी? प्रोटोटाइप को देखकर जवाब ‘हाँ’ लगता है।
ऑटोमोबाइल इतिहास में कुछ कारें ऐसी होती हैं जो एक ट्रेंड सेट करती हैं। Project V वही कार हो सकती है।
यह साबित करती है कि इलेक्ट्रिक भविष्य को भारी और जटिल होना जरूरी नहीं है।
यामाहा की मोटर तकनीक और केटरहम का चेसिस जादू मिलकर एक ऐसी मशीन बनाते हैं जो आत्मा को छू जाती है।
जनवरी 2026 के इस खुलासे ने कार प्रेमियों के दिलों में एक नई उम्मीद जगा दी है।
इलेक्ट्रिक कारों के शोर में, Project V ने अपनी खामोश परफॉरमेंस से सबसे ज्यादा शोर मचाया है।
यह सिर्फ एक कार नहीं है; यह ड्राइविंग के ओरिजिनल आनंद को बचाने की एक कोशिश है। और अभी के लिए, यह कोशिश बहुत शानदार लग रही है।
FAQ: Quick Facts About Project V
यहाँ कुछ आम सवालों के जवाब दिए गए हैं जो पाठकों के मन में हो सकते हैं।
क्या यह कार पूरी तरह से इलेक्ट्रिक है? हाँ, Project V एक 100% बैटरी इलेक्ट्रिक व्हीकल (BEV) है। इसमें कोई पेट्रोल इंजन नहीं है।
इसकी टॉप स्पीड क्या है? इसकी अनुमानित टॉप स्पीड 230 किमी/घंटा (143 mph) है।
क्या यामाहा अपनी खुद की कार ला रही है? नहीं, यामाहा केवल पावरट्रेन पार्टनर है। कार केटरहम ब्रांड के तहत ही बेची जाएगी।
बैटरी की वारंटी क्या होगी? अभी इसकी पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इंडस्ट्री स्टैंडर्ड के मुताबिक 8 साल की वारंटी की उम्मीद है।
क्या इसमें गियर्स हैं? नहीं, अधिकांश EVs की तरह इसमें भी सिंगल-स्पीड ट्रांसमिशन है, लेकिन ट्यूनिंग बहुत स्पोर्टी है।